कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की विपक्षी एकता की कोशिशों को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा झटका दिया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के गैर कांग्रेस-गैर बीजेपी दलों के फेडरल फ्रंट का अखिलेश यादव ने समर्थन किया है. हालांकि सपा अध्यक्ष ने कहा कि बुधवार को केसीआर से मुलाकात होनी संभव नहीं है.
अखिलेश ने कहा कि फेडरल फ्रंट बनाने के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर से मुलाकात करेंगे. मध्य प्रदेश में सपा के जीते इकलौते विधायक को मंत्री न बनाए जाने से अखिलेश नाराज हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस का भी धन्यवाद. एमपी में हमारे एक मात्र विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है ऐसे में अब हमारा रास्ता साफ है.
अखिलेश यादव ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन जरूर होगा. बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए सभी दलों को एक साथ आना चाहिए. उन्होंने कहा कि युवा कुम्भ में रोजगार की बात होती तो अच्छा होता. अखिलेश ने कहा कि लखनऊ के लोक भवन में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा लगाना ठीक है, लेकिन हमारी सरकार आएगी तो हम भी एक मूर्ति लगाएंगे .
केसीआर कांग्रेस को दरकिनार कर अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ गठबंधन की कवायद में जुटे हैं. अब केसीआर के फेडरल फ्रंट को समर्थन देना कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है.
ये कहा जा सकता है कि 1994 की घटनाओं के तार उनके बचपन से ही जुड़ने शुरू हो गए थे. यही वो दौर था जब रवांडा पर बेल्जियम का शासन हुआ और इस ओपनिवेशिक शक्ति ने रवांडा के लोगों को स्पष्ट रूप से बंटे हुए समूहों में बांट दिया. पहचान पत्र जारी करके लोगों को बता दिया गया कि वो हूतू हैं या तुत्सी.
कारूहिंबी का परिवार हूतू था और ये समुदाय रवांडा में बहुसंख्यक था. लेकिन अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों को उच्च वर्गीय समझा जाता था और यही वजह थी कि बेल्जियम के शासनकाल में नौकरियों और व्यापार में इसी समूह का बोलबाला था.
इस बंटवारे ने दोनों समूहों के बीच तनाव भी पैदा किया. 1959 में कारुहिंबी युवा ही थीं जब तुत्सी राजा किगेरी पंचम और उनके दसियों हज़ार तुत्सी समर्थकों को पड़ोसी उगांडा में शरण लेनी पड़ी. ये रवांडा में हुई हूती क्रांति के बाद की बात है.
जब 1994 में हूतू राष्ट्रपति जुवेनाल हेब्यारिमाना का विमान मार गिरा दिए जाने के बाद तुत्सियों के ख़िलाफ़ हिंसा शुरू हुई तो ये पहली बार नहीं था जब कारूहिंबी ने इस तरह की हिंसा देखी थी.
Wednesday, December 26, 2018
Monday, December 17, 2018
गहलोत ने मुख्यमंत्री और पायलट ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, 12 दलों के नेता पहुंचे
अशोक गहलोत ने सोमवार को राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल कल्याण सिंह ने उन्हें शपथ दिलाई। वे तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ के दौरान सचिन लाल पगड़ी बांधे हुए थे। समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। शपथ ग्रहण में संभावित महागठबंधन के 12 दलों के नेता नजर आए।
सोनिया नहीं पहुंचीं
गहलोत-पायलट के शपथ ग्रहण में कांग्रेस से राहुल, मनमोहन के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, पुड्डुचेरी के सीएम वी नारायणसामी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुमारी शैलजा, जतिन प्रसाद, नवजोत सिंह सिद्धू मौजूद थे। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी मौजूद नहीं थीं।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे निजी वजहों से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो पाए। अखिलेश ने ट्वीट करके बताया कि उनके प्रतिनिधि के तौर पर विधायक राजेश कुमार पहुंचे।
अशोक गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। तब उनकी उम्र 47 थी। इसके बाद 2008 में उन्हें सत्ता की कमान मिली। तब वे 57 साल के थे। उनकी अभी उम्र 67 साल है।
राजस्थान के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी जयपुर में शपथ लेने के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ भोपाल पहुंचे। कमलनाथ के शपथ ग्रहण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राजीव शुक्ला, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री डी शिवकुमार, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी, आनंद शर्मा, राज बब्बर, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा, उनके बेटे और सांसद दीपेंदर हुड्डा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, पंजाब में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, विवेक तन्खा मौजूद थे।
मंत्रिमंडल में ऐसे हो सकता है क्षेत्रीय संतुलन
कमलनाथ मंत्रिमंडल के गठन में वरिष्ठता, क्षेत्रीय संतुलन और जातिगत समीकरण का ध्यान रखा जा सकता है। उप मुख्यमंत्री को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। 20 से ज्यादा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर मंथन चल रहा है।
सोनिया नहीं पहुंचीं
गहलोत-पायलट के शपथ ग्रहण में कांग्रेस से राहुल, मनमोहन के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, पुड्डुचेरी के सीएम वी नारायणसामी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुमारी शैलजा, जतिन प्रसाद, नवजोत सिंह सिद्धू मौजूद थे। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी मौजूद नहीं थीं।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे निजी वजहों से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो पाए। अखिलेश ने ट्वीट करके बताया कि उनके प्रतिनिधि के तौर पर विधायक राजेश कुमार पहुंचे।
अशोक गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। तब उनकी उम्र 47 थी। इसके बाद 2008 में उन्हें सत्ता की कमान मिली। तब वे 57 साल के थे। उनकी अभी उम्र 67 साल है।
राजस्थान के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी जयपुर में शपथ लेने के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ भोपाल पहुंचे। कमलनाथ के शपथ ग्रहण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राजीव शुक्ला, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री डी शिवकुमार, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी, आनंद शर्मा, राज बब्बर, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा, उनके बेटे और सांसद दीपेंदर हुड्डा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, पंजाब में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, विवेक तन्खा मौजूद थे।
मंत्रिमंडल में ऐसे हो सकता है क्षेत्रीय संतुलन
कमलनाथ मंत्रिमंडल के गठन में वरिष्ठता, क्षेत्रीय संतुलन और जातिगत समीकरण का ध्यान रखा जा सकता है। उप मुख्यमंत्री को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। 20 से ज्यादा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर मंथन चल रहा है।
Wednesday, December 5, 2018
फिल्मी पर्दे से लेकर राजनीति में रही जयललिता की धाक, 5 बार बनी थीं CM
आज तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की दूसरी पुण्यतिथि है. दो साल पहले जयललिता ने 5 दिसंबर को अपोलो अस्पताल में आखिरी सांस ली थी. सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस मौके पर तमिलनाडु मेंकई कार्यक्रमों को आयोजन किया जा रहा है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है.
जयललिता का अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा. एक विद्यार्थी के तौर पर भी पढ़ाई में उनकी काफी रुचि रही और 15 साल की उम्र में फिल्मी करियर शुरू करने वाली जयललिता एक सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस बनीं. उसके बाद उन्होंने तमिल सिनेमा केसुपरस्टार रहे एमजीआर के साथ कई फिल्में की.
करुणानिधि का वो बेटा जो बागी होकर जयललिता से मिल गया था
हालांकि, बाद में जयललिता ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कह कर 1982 में राजनीति जगत में कदम रखा. कहा जाता है कि अंग्रेजी में उनकी मजबूती को देखकर एमजीआर उनको राजनीति में लेकर आए थे. एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठनकिया. साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया और राज्यसभा के लिए मनोनीत भी किया.
इस बीच, जयललिता और एमजीआर के बीच मतभेद की खबरें भी आईं, लेकिन जयललिता ने 1984 में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया. 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक दो टुकड़ों में बंट गई. एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन और जयललिता दोनों के पक्ष मेंसमर्थक-कार्यकर्ता बंट चुके थे. 1988 में जानकी के 21 दिन तक मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया. वहीं, अगले चुनाव में हार के बाद जानकी ने इस्तीफा दे दिया और जयललिता को आगे आने का मौका मिला.
अम्मा की ये 5 योजनाएं आज भी हैं लोगों के दिलों में जिंदा...
जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. कई हार और जीत के सफर के साथ उन्होंने पांच बार प्रदेश की कमान संभाली. आय से अधिक संपत्ति रखने के लिए जयललिता पर केस चला जिसमें वो दोषी भी पाई गईं. आखिरकार27 सितंबर 2014 को बेंगलुरु की एक अदालत ने जयललिता को चार साल कैद की सजा सुनाई गई.
जयललिता का अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा. एक विद्यार्थी के तौर पर भी पढ़ाई में उनकी काफी रुचि रही और 15 साल की उम्र में फिल्मी करियर शुरू करने वाली जयललिता एक सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस बनीं. उसके बाद उन्होंने तमिल सिनेमा केसुपरस्टार रहे एमजीआर के साथ कई फिल्में की.
करुणानिधि का वो बेटा जो बागी होकर जयललिता से मिल गया था
हालांकि, बाद में जयललिता ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कह कर 1982 में राजनीति जगत में कदम रखा. कहा जाता है कि अंग्रेजी में उनकी मजबूती को देखकर एमजीआर उनको राजनीति में लेकर आए थे. एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठनकिया. साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया और राज्यसभा के लिए मनोनीत भी किया.
इस बीच, जयललिता और एमजीआर के बीच मतभेद की खबरें भी आईं, लेकिन जयललिता ने 1984 में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया. 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक दो टुकड़ों में बंट गई. एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन और जयललिता दोनों के पक्ष मेंसमर्थक-कार्यकर्ता बंट चुके थे. 1988 में जानकी के 21 दिन तक मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया. वहीं, अगले चुनाव में हार के बाद जानकी ने इस्तीफा दे दिया और जयललिता को आगे आने का मौका मिला.
अम्मा की ये 5 योजनाएं आज भी हैं लोगों के दिलों में जिंदा...
जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. कई हार और जीत के सफर के साथ उन्होंने पांच बार प्रदेश की कमान संभाली. आय से अधिक संपत्ति रखने के लिए जयललिता पर केस चला जिसमें वो दोषी भी पाई गईं. आखिरकार27 सितंबर 2014 को बेंगलुरु की एक अदालत ने जयललिता को चार साल कैद की सजा सुनाई गई.
Monday, November 19, 2018
पहले ICC मीटिंग में भिखारी की तरह जाता था बोर्ड'
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने मौजूदा समय में बीसीसीआई के वर्ल्ड क्रिकेट में बड़े रुतबे पर बात करते हुए कहा, आज समय बदल गया है और BCCI का रुतबा अलग है. आज भारतीय बोर्ड को किसी के आगे झुकना नहीं पड़ता.
साहित्य आजतक 2018 के मंच पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी और 1983 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य मदन लाल ने शिरकत की. इस सेशन को सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर स्पोर्ट्स विक्रांत गुप्ता ने संचालित किया.
बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'जो आज इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) है, वो पहले इंपीरियल क्रिकेट कांफ्रेंस (ICC) हुआ करती थी और इसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के पास ज्यादा अधिकार होते थे.'
बेदी ने कहा, 'उन दिनों भारतीय बोर्ड के प्रतिनिधि ICC मीटिंग में भिखारी की तरह जाते थे. आज जो ICC है, उसमें सभी देश के क्रिकेट बोर्ड के पास सामान अधिकार है. उन दिनों में जो गारंटी मनी भी होती थी वो ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज को ज्यादा मिलती थी.'
उन्होंने कहा, 'आज चाहे वो बांग्लादेश है या जिम्बाब्वे सभी को समान गारंटी मनी मिलती है.' बेदी ने कहा, 'आज जो क्रिकेट में तहजीब है वो काफी बदल गई है. आज भारतीय बोर्ड को किसी के आगे झुकना नहीं पड़ता.'
बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'नवाब पटौदी जैसा कप्तान मैंने नहीं देखा जब वह कप्तानी थे तो टीम मीटिंग ने खिलाड़ियों को बताते थे कि हम पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र और बंगाल के लिए नहीं भारत के लिए खेल रहे हैं.'
आपको बता दें कि बिशन सिंह बेदी लेफ्ट आर्म स्पिनर थे. बेदी ने 1966 से 1979 तक टेस्ट क्रिकेट खेला. उन्होंने कुल 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए. वह 22 टेस्ट मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे. घरेलू क्रिकेट में बेदी 15 साल की उम्र से उत्तर पंजाब के लिए खेलते थे.
वह 1968-69 और 1974-75 के रणजी ट्रॉफी सीजन के लिए दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने रिकॉर्ड 64 विकेट झटके. बेदी बहुत समय तक इंग्लिश काउंटी क्रिकेट की नॉर्थम्प्टनशायर के लिए भी खेले. बेदी को 1976 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया. वह मंसूर अली खान पटौदी के बाद कप्तान बने थे.
बेदी की कप्तानी में पहली बार टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के विरूद्ध 1976 में पोर्ट-ऑफ-स्पेन में जीता गया था. इसके बाद, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी टेस्ट सीरीज 2-0 से जीती. भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत में ही, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज हार गया. इन हार के बाद, कप्तानी बिशन सिंह बेदी से छीनकर, सुनील गावस्कर को दे दी गई.
साहित्य आजतक 2018 के मंच पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी और 1983 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य मदन लाल ने शिरकत की. इस सेशन को सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर स्पोर्ट्स विक्रांत गुप्ता ने संचालित किया.
बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'जो आज इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) है, वो पहले इंपीरियल क्रिकेट कांफ्रेंस (ICC) हुआ करती थी और इसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के पास ज्यादा अधिकार होते थे.'
बेदी ने कहा, 'उन दिनों भारतीय बोर्ड के प्रतिनिधि ICC मीटिंग में भिखारी की तरह जाते थे. आज जो ICC है, उसमें सभी देश के क्रिकेट बोर्ड के पास सामान अधिकार है. उन दिनों में जो गारंटी मनी भी होती थी वो ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज को ज्यादा मिलती थी.'
उन्होंने कहा, 'आज चाहे वो बांग्लादेश है या जिम्बाब्वे सभी को समान गारंटी मनी मिलती है.' बेदी ने कहा, 'आज जो क्रिकेट में तहजीब है वो काफी बदल गई है. आज भारतीय बोर्ड को किसी के आगे झुकना नहीं पड़ता.'
बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'नवाब पटौदी जैसा कप्तान मैंने नहीं देखा जब वह कप्तानी थे तो टीम मीटिंग ने खिलाड़ियों को बताते थे कि हम पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र और बंगाल के लिए नहीं भारत के लिए खेल रहे हैं.'
आपको बता दें कि बिशन सिंह बेदी लेफ्ट आर्म स्पिनर थे. बेदी ने 1966 से 1979 तक टेस्ट क्रिकेट खेला. उन्होंने कुल 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए. वह 22 टेस्ट मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे. घरेलू क्रिकेट में बेदी 15 साल की उम्र से उत्तर पंजाब के लिए खेलते थे.
वह 1968-69 और 1974-75 के रणजी ट्रॉफी सीजन के लिए दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने रिकॉर्ड 64 विकेट झटके. बेदी बहुत समय तक इंग्लिश काउंटी क्रिकेट की नॉर्थम्प्टनशायर के लिए भी खेले. बेदी को 1976 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया. वह मंसूर अली खान पटौदी के बाद कप्तान बने थे.
बेदी की कप्तानी में पहली बार टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के विरूद्ध 1976 में पोर्ट-ऑफ-स्पेन में जीता गया था. इसके बाद, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी टेस्ट सीरीज 2-0 से जीती. भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत में ही, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज हार गया. इन हार के बाद, कप्तानी बिशन सिंह बेदी से छीनकर, सुनील गावस्कर को दे दी गई.
Friday, November 2, 2018
राम मंदिर पर RSS का ऐलान- जरूरत पड़ी तो होगा 1992 जैसा आंदोलन
भैयाजी जोशी ने कहा कि हमें अपेक्षा है कि भव्य राम मंदिर बनेगा और कोर्ट में भावनाओं का ध्यान रखते हुए ही फैसला देगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट से अपेक्षा भी काफी लंबी हो चुकी हैं, मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी 7 साल हो चुके हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को कहा कि जरुरत पड़े तो फिर से 1992 की तरह राम मंदिर के लिए आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर इंतजार काफी लंबा हो गया है.
भैयाजी जोशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरीके से राम मंदिर पर फैसला दिया उसे हम सब चकित है और इस टिप्पणी से हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर 30 साल से आंदोलन चल रहा है और कोर्ट को हिन्दुओं की भावनाओं को ख्याल रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि आगे कोर्ट हिन्दुओं को भावनाओं को ध्यान रखेगा.
भैयाजी जोशी ने कहा कि हमें अपेक्षा है कि भव्य राम मंदिर बनेगा और कोर्ट में भावनाओं का ध्यान रखते हुए ही फैसला देगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट से अपेक्षा काफी लंबी हो चुकी हैं, मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी 7 साल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि 3 जजों की बैंच के गठन के बाद हमें फैसले की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो 1992 की तरह फिर से राम मंदिर को लेकर आंदोलन होगा.
राम मंदिर के लिए अध्यादेश के सवाल पर जोशी ने कहा कि अध्यादेश जिनकों मांगना है वो मांगेंगे. लेकिन इसके लिए फैसला सरकार को करना है. उन्होंने कहा कि राम सबके हृदय में रहते हैं पर वो प्रकट होते हैं मंदिरों को द्वारा. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं मंदिर बने.
जोशी तीन दिन तक चली RSS की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे. शुक्रवार को ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बैठक के खत्म होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी. भागवत के अलावा शाह कई अन्य संघ नेताओं से भी मिले थे.
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे. अब दोनों शादी के बंधन में बंध रहे हैं. दोनों की शादी का समारोह 14 और 15 नवंबर को संपन्न होगा. इससे पहले दीपिका पादुकोण के बेंगलुरु स्थित घर में शादी से पहले की पूजा-पाठ का आयोजन किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपिका ने पारंपरिक नंदी पूजा में हिस्सा लिया. कुछ तस्वीरें सामने आई हैं.
इन तस्वीरों को दीपिका की स्टाइलिस्ट शलीना नतानी ने शेयर किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर इन तस्वीरों के साथ लिखा है, "एक नई शुरुआत."
एक अन्य तस्वीर के साथ शलीना ने लिखा है- "आपको सबसे ज्यादा प्यार. इस सबकी शुरुआत के लिए इंतजार नहीं कर सकती. आप दुनिया में सबसे ज्याद खुशियों की हकदार हैं."
रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण 14 नवंबर को इटली में सात फेरे लेंगे. इस बात का खुलासा दीपिका और रणवीर ने सोशल मीडिया पर शादी का कार्ड शेयर कर किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों ने शादी के लिए इटली में 'लेक कोमो' का वेन्यू फाइनल किया है.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि - रणवीर और दीपिका की शादी से जुड़ी तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस ड्रीम वेडिंग में सिर्फ 30 मेहमान बुलाए जाएंगे.
पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, ये शादी कलर कॉर्डिनेटेड होगी. न सिर्फ फैमिली बल्कि वेटर्स को भी ड्रेस कोड का पालन करना होगा. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शेफ्स के साथ एक करार किया गया, जिसमें ये शर्त होगी कि वे जो रेसीपी इस शादी में इस्तेमाल करेंगे, उसे कहीं और नहीं दोहराएंगे. इसके लिए एक लिखित बॉन्ड साइन किया गया है. ये सभी डिशेस बेहद खास होंगी.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को कहा कि जरुरत पड़े तो फिर से 1992 की तरह राम मंदिर के लिए आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर इंतजार काफी लंबा हो गया है.
भैयाजी जोशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरीके से राम मंदिर पर फैसला दिया उसे हम सब चकित है और इस टिप्पणी से हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर 30 साल से आंदोलन चल रहा है और कोर्ट को हिन्दुओं की भावनाओं को ख्याल रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि आगे कोर्ट हिन्दुओं को भावनाओं को ध्यान रखेगा.
भैयाजी जोशी ने कहा कि हमें अपेक्षा है कि भव्य राम मंदिर बनेगा और कोर्ट में भावनाओं का ध्यान रखते हुए ही फैसला देगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट से अपेक्षा काफी लंबी हो चुकी हैं, मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी 7 साल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि 3 जजों की बैंच के गठन के बाद हमें फैसले की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो 1992 की तरह फिर से राम मंदिर को लेकर आंदोलन होगा.
राम मंदिर के लिए अध्यादेश के सवाल पर जोशी ने कहा कि अध्यादेश जिनकों मांगना है वो मांगेंगे. लेकिन इसके लिए फैसला सरकार को करना है. उन्होंने कहा कि राम सबके हृदय में रहते हैं पर वो प्रकट होते हैं मंदिरों को द्वारा. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं मंदिर बने.
जोशी तीन दिन तक चली RSS की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे. शुक्रवार को ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बैठक के खत्म होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी. भागवत के अलावा शाह कई अन्य संघ नेताओं से भी मिले थे.
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे. अब दोनों शादी के बंधन में बंध रहे हैं. दोनों की शादी का समारोह 14 और 15 नवंबर को संपन्न होगा. इससे पहले दीपिका पादुकोण के बेंगलुरु स्थित घर में शादी से पहले की पूजा-पाठ का आयोजन किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपिका ने पारंपरिक नंदी पूजा में हिस्सा लिया. कुछ तस्वीरें सामने आई हैं.
इन तस्वीरों को दीपिका की स्टाइलिस्ट शलीना नतानी ने शेयर किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर इन तस्वीरों के साथ लिखा है, "एक नई शुरुआत."
एक अन्य तस्वीर के साथ शलीना ने लिखा है- "आपको सबसे ज्यादा प्यार. इस सबकी शुरुआत के लिए इंतजार नहीं कर सकती. आप दुनिया में सबसे ज्याद खुशियों की हकदार हैं."
रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण 14 नवंबर को इटली में सात फेरे लेंगे. इस बात का खुलासा दीपिका और रणवीर ने सोशल मीडिया पर शादी का कार्ड शेयर कर किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों ने शादी के लिए इटली में 'लेक कोमो' का वेन्यू फाइनल किया है.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि - रणवीर और दीपिका की शादी से जुड़ी तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस ड्रीम वेडिंग में सिर्फ 30 मेहमान बुलाए जाएंगे.
पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, ये शादी कलर कॉर्डिनेटेड होगी. न सिर्फ फैमिली बल्कि वेटर्स को भी ड्रेस कोड का पालन करना होगा. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शेफ्स के साथ एक करार किया गया, जिसमें ये शर्त होगी कि वे जो रेसीपी इस शादी में इस्तेमाल करेंगे, उसे कहीं और नहीं दोहराएंगे. इसके लिए एक लिखित बॉन्ड साइन किया गया है. ये सभी डिशेस बेहद खास होंगी.
Subscribe to:
Comments (Atom)